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परस्पर ज्ञान वितरण

राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी विधिक बन्धुत्व के सदस्यों और दूसरों से इस अनुभाग में प्रस्तुतियाँ आमंत्रित करता है। प्रस्तुतियाँ निम्नलिखित सम्पादकीय नीति के अनुसार होना चाहिए।

1. इस अनुभाग का मुख्य लक्ष्य है - उन लोगों को मंच प्रदान करना जो अपना ज्ञान और अनुभव विधि के क्षेत्र में परस्पर बाँटने मे रूचि रखते हैं। इस हेतु यह अनुभाग न्यायाधीशों, वकीलों, अकाडेमिक्स, विधि छात्रों और अन्य अनुशासनों के विशेषज्ञों से प्रस्तुतियों का स्वागत करता है।

2.प्रस्तुतियाँ लेखों/निबन्धों/समीक्षा अथवा टिप्पणी के रूप में हो सकती हैं। केवल विचार इतना है कि वह प्रकृति में विद्धतापूर्ण हो और उसे प्रस्तुत करने वाले लेखक का मौलिक कार्य हो।

सभी प्रस्तुतियाँ nja[at]nja[dot]gov[dot]in पर मेल की जा सकती हैं अथवा एक डिसक में ’परस्पर ज्ञान वितरण', राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भदभदा रोड पो.आ. सूरज नगर भोपाल - 462044 के पते पर भेजी जा सकती है।

’’समानता निश्चित करना : विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका (डा. के.एन. चन्द्रशेखरन् पिल्लै द्वारा लेख) ”

आपराधिक न्याय प्रशासन में न्यायालयों की आधारभूत भूमिका (डा. के.एन. चन्द्रशेखरन् पिल्लै द्वारा लेख) ”

भारतीय न्यायापालिका का मिशन एवं दृष्टि (डा. के.एन. चन्द्रशेखरन् पिल्लै द्वारा लेख)”

क्रास केसे का ट्रायल : मुद्दे और चुनौतियाँ’’ ’’(श्री एस.पी. श्रीवास्वत, एच.जे.एस द्वारा लेख)”

राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी की स्थापना से संबंधित घटनाओं का संक्षिप्त इतिहास” - जस्टिस चन्द्रभूषण माननीय पूर्व रजिस्ट्रार, सर्वोच्च न्यायाल भारत

पर्यावरण एवं पर्यावरणीय विधि (श्री नरिन्दर कुमार, अतिरिक्त जिला एवं सेशन्स जज तीस हजारी कोर्ट दिल्ली, द्वारा लेख)”

Narinder Kumar, Seamless And Continuous Process In Suits Till Delivery Of Relief : Argument For Its Need (22/11/2018) ”

Narinder Kumar, Law Of Limitation And Exclusion Of Time When Defendant Is Absent From India : Need For Reconsideration (22/11/2018) ”